लोकतंत्र एवं वैज्ञानिक मानसिकता
दीवान, हृदय कान्त (2023) लोकतंत्र एवं वैज्ञानिक मानसिकता सन्दर्भ (148). pp. 29-41.
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Introduction
क्या है वैज्ञानिक मानसिकता? एक लोकतांत्रिक समाज में इसका होना क्यों ज़रूरी माना जाता है? इसके साथ ही, क्यों इसे लगातार सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व धार्मिक लालचों के चलते प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है? जहाँ एक ओर वैज्ञानिक मानसिकता सामाजिक खामियों को दूर करने में मदद करती है, वहीं दूसरी ओर, इसे धार्मिक-विश्वास विरोधी बताकर इसका मखौल उड़ाया जाता है। तो क्या वैज्ञानिक मानसिकता की हार लोकतंत्र के मूल्यों की हार का रास्ता तय करती है? हृदय कान्त का यह लेख भारतीय सन्दर्भ में इससे जुड़े प्रसंगों की गहरी तहक़ीक़ात और व्याख्या करता है। यह मुद्दा बड़े लम्बे समय से ज्वलन्त है, जिस पर विचार-विमर्श करना बेहद ज़रूरी है।
| Item Type: | Article |
|---|---|
| Discipline: | Social Science Education |
| Programme: | Works of Partner Organisations > Eklavya Foundation > Sandarbh |
| Title(English): | Democracy and the Scientific Temper |
| Creators(English): | Hriday Kant Diwan |
| Publisher: | Eklavya Foundation |
| Journal or Publication Title(English): | Sandarbh |
| Related URLs: | |
| URI: | http://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/5602 |
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Disclaimer
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ಅಜೀಂ ಪ್ರೇಮ್ಜಿ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಅನುವಾದ ಉಪಕ್ರಮದ ವತಿಯಿಂದ ಇದನ್ನು ಇಂಗ್ಲೀಷ್ನಿಂದ ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಅನುವಾದಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಂಪನ್ಮೂಲವನ್ನು ವಾಣಿಜ್ಯೇತರ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಉದ್ದೇಶಗಳಿಗೆ ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ.
