सोचना, याद करना, समझना और सीखना (भाग-II)
कुमार, राजेश (2021) सोचना, याद करना, समझना और सीखना (भाग-II) शिक्षा विमर्श. pp. 19-23. ISSN 2231-0509
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Introduction
यह लेख संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं (Cognitive Processes)—सोचना, समझना, याद करना और सीखना—के बीच के अन्तर्सम्बन्धों की एक मौलिक और मनोवैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। लेखक का मुख्य तर्क है कि इन चारों प्रक्रियाओं को अलग-अलग मानसिक गतिविधियों के रूप में देखना केवल वर्गीकरण की समस्या है, जबकि वास्तव में ये सभी 'अर्थ निर्माण' (Meaning making) की एक ही प्रक्रिया के विभिन्न पहलू हैं। लेख में बताया गया है कि जैसे याद करना और समझना सोचने के वर्तमान और भूतकाल से जुड़े हैं, वैसे ही सीखना इसका भविष्यकाल है। लेखक कबीर की साखी "एक हि साधे सब सधे" के माध्यम से शिक्षकों को यह सुझाव देते हैं कि कक्षा में इन प्रक्रियाओं को अलग-अलग साधने के बजाय केवल अर्थ निर्माण पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
| Item Type: | Article |
|---|---|
| Discipline: | Education |
| Programme: | Works of Partner Organisations > Digantar > Shiksha Vimarsh |
| Title(English): | Thinking, Remembering, Understanding, and Learning (Part-II) |
| Creators(English): | Rajesh Kumar |
| Publisher: | Digantar |
| Journal or Publication Title(English): | Shikhsha Vimarsh |
| Related URLs: | |
| URI: | http://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/5660 |
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Disclaimer
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ಅಜೀಂ ಪ್ರೇಮ್ಜಿ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಅನುವಾದ ಉಪಕ್ರಮದ ವತಿಯಿಂದ ಇದನ್ನು ಇಂಗ್ಲೀಷ್ನಿಂದ ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಅನುವಾದಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಂಪನ್ಮೂಲವನ್ನು ವಾಣಿಜ್ಯೇತರ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಉದ್ದೇಶಗಳಿಗೆ ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ.
