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एक हि साधे सब सधे

कुमार, राजेश (2019) एक हि साधे सब सधे शिक्षा विमर्श. pp. 21-27. ISSN 2231-0509

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Introduction

प्रस्तुत आलेख वर्तमान स्कूली शिक्षा व्यवस्था में केवल याद करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाता है। लेखक के अनुसार, याद करना, समझना और सीखना अलग-अलग मानसिक प्रक्रियाएँ नहीं हैं, बल्कि ये सभी सोचने के ही विविध रूप हैं। यदि बच्चों में सोचने की स्वाभाविक प्रक्रिया को सुनिश्चित कर दिया जाए, तो याद करना और सीखना अपने आप सम्भव हो जाता है। यह आलेख इस आम धारणा को भी चुनौती देता है कि वैचारिक प्रश्नों पर अमूर्त रूप से सोचना व्यावहारिक परिस्थितियों में सोचने से श्रेष्ठ होता है। लेखक का मानना है कि अलग-अलग लोगों के सोचने में अन्तर मानसिक प्रक्रिया के कारण नहीं, बल्कि उनके मूल्यों, मान्यताओं और प्राथमिकताओं के कारण होता है। अन्‍तत: यह रचना कबीर की साखी के माध्यम से समग्रतावादी शिक्षण का एक नवीन दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इस लेख का दूसरा भाग ‘सोचना,याद करना, समझना और सीखना’ शीर्षक से अनुवाद सम्‍पदा पर ही आप देख सकते हैं।

Item Type: Article
Discipline: Education
Programme: Works of Partner Organisations > Digantar > Shiksha Vimarsh
Title(English): Mastering the One to Master the All
Creators(English): Rajesh Kumar
Publisher: Digantar
Journal or Publication Title(English): Shikhsha Vimarsh
Related URLs:
URI: http://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/5663
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Disclaimer

Translated from English to Hindi/Kannada by Translations Initiative, Azim Premji University. This academic resource is intended for non-commercial/academic/educational purposes only.

अनुवाद पहल, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा अँग्रेज़ी से हिन्दी में अनूदित। इस अकादमिक संसाधन का उपयोग केवल ग़ैर-व्यावसायिक, अकादमिक एवं शैक्षिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

ಅಜೀಂ ಪ್ರೇಮ್‍ಜಿ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಅನುವಾದ ಉಪಕ್ರಮದ ವತಿಯಿಂದ ಇದನ್ನು ಇಂಗ್ಲೀಷ್‍ನಿಂದ ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಅನುವಾದಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಂಪನ್ಮೂಲವನ್ನು ವಾಣಿಜ್ಯೇತರ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಉದ್ದೇಶಗಳಿಗೆ ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ.