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ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में 'जगह' की निर्मिति

आर्य, शचीन्द्र (2019) ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में 'जगह' की निर्मिति शिक्षा विमर्श. pp. 33-40. ISSN 2231-0509

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ग्रामीण परिप्रेक्ष्‍य में जगह की निर्मिति.pdf

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Introduction

यह लेख ग्रामीण परिवेश में 'जगह' या 'स्थान' के सामाजिक और शैक्षिक अर्थों की पड़ताल करता है। लेखक, जो स्वयं एक शोधार्थी हैं, ग्रामीण विद्यालय के अनुभवों के माध्यम से यह समझने का प्रयास करते हैं कि किशोर और किशोरियों के लिए 'जगह' का निर्माण कैसे होता है। लेख में विशेष रूप से जेंडर (लिंग) के आधार पर बँटे हुए स्थानों और उनमें निहित सामाजिक वर्जनाओं पर चर्चा की गई है। लेखक यह सवाल उठाते हैं कि क्या हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था ग्रामीण संरचना में कोई सार्थक परिवर्तन लाने या लड़के-लड़कियों के बीच की दूरियों को कम करने में सक्षम है। यह आलेख समाज में व्याप्त विषमताओं, जातिगत जकड़न और आधुनिकता के नाम पर पनप रहे नए प्रकार के भेदभावों पर भी गम्‍भीर चिन्‍तन प्रस्तुत करता है।

Item Type: Article
Discipline: Education
Programme: Works of Partner Organisations > Digantar > Shiksha Vimarsh
Title(English): The Construction of 'Space' in a Rural Context
Creators(English): Sachindra Arya
Publisher: Digantar
Journal or Publication Title(English): Shikhsha Vimarsh
Related URLs:
URI: http://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/5647
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Disclaimer

Translated from English to Hindi/Kannada by Translations Initiative, Azim Premji University. This academic resource is intended for non-commercial/academic/educational purposes only.

अनुवाद पहल, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा अँग्रेज़ी से हिन्दी में अनूदित। इस अकादमिक संसाधन का उपयोग केवल ग़ैर-व्यावसायिक, अकादमिक एवं शैक्षिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

ಅಜೀಂ ಪ್ರೇಮ್‍ಜಿ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಅನುವಾದ ಉಪಕ್ರಮದ ವತಿಯಿಂದ ಇದನ್ನು ಇಂಗ್ಲೀಷ್‍ನಿಂದ ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಅನುವಾದಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಂಪನ್ಮೂಲವನ್ನು ವಾಣಿಜ್ಯೇತರ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಉದ್ದೇಶಗಳಿಗೆ ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ.