शिक्षा के समाजशास्त्रीय सिद्धान्त-VI: शिक्षा का वेबरवादी समाजशास्त्र
मदान, अमन (2019) शिक्षा के समाजशास्त्रीय सिद्धान्त-VI: शिक्षा का वेबरवादी समाजशास्त्र शिक्षा विमर्श. pp. 20-27. ISSN 2231-0509
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Introduction
यह लेख शिक्षा के समाजशास्त्र को प्रसिद्ध समाजशास्त्री मैक्स वेबर के दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करता है। लेखक ने दिल्ली के कॉलेजों में 'कट-ऑफ' और ऊँचे अंकों की होड़ जैसे समकालीन उदाहरणों के माध्यम से वेबर के 'हैसियत' (Status) और 'प्रतिष्ठा' के सिद्धान्तों की व्याख्या की है। लेख स्पष्ट करता है कि शिक्षा केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज में अपनी विशिष्ट पहचान और वर्चस्व बनाए रखने का एक साधन है। मार्क्सवाद के वर्ग-संघर्ष से इतर, वेबरवादी नजरिया यह बताता है कि कैसे विभिन्न 'हैसियत समूह' अपनी संस्कृति और शक्ति को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षा पर नियंत्रण पाने की कोशिश करते हैं। यह लेख हमें शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य और वर्तमान प्रतिस्पर्धी व्यवस्था के बीच के अन्तर को समझने के लिए प्रेरित करता है।
| Item Type: | Article |
|---|---|
| Discipline: | Education |
| Programme: | Works of Partner Organisations > Digantar > Shiksha Vimarsh |
| Title(English): | Sociological Theories of Education-VI: Weberian Sociology of Education |
| Creators(English): | Amman Madan |
| Publisher: | Digantar |
| Journal or Publication Title(English): | Shikhsha Vimarsh |
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| URI: | http://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/5658 |
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Disclaimer
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अनुवाद पहल, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा अँग्रेज़ी से हिन्दी में अनूदित। इस अकादमिक संसाधन का उपयोग केवल ग़ैर-व्यावसायिक, अकादमिक एवं शैक्षिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
ಅಜೀಂ ಪ್ರೇಮ್ಜಿ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಅನುವಾದ ಉಪಕ್ರಮದ ವತಿಯಿಂದ ಇದನ್ನು ಇಂಗ್ಲೀಷ್ನಿಂದ ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಅನುವಾದಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಂಪನ್ಮೂಲವನ್ನು ವಾಣಿಜ್ಯೇತರ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಉದ್ದೇಶಗಳಿಗೆ ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ.
