शिक्षा के समाजशास्त्रीय सिद्धान्त-VII: पियेर बोर्दियु
मदान, अमन (2019) शिक्षा के समाजशास्त्रीय सिद्धान्त-VII: पियेर बोर्दियु शिक्षा विमर्श. pp. 5-11. ISSN 2231-0509
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Introduction
यह लेख सुप्रसिद्ध फ्रांसीसी समाजशास्त्री पियेर बोर्दियु के शैक्षिक विचारों और उनके 'पुनरुत्पादन' (Reproduction) के सिद्धान्त पर केन्द्रित है। लेख स्पष्ट करता है कि कैसे औपचारिक रूप से समान दिखने वाली शिक्षा व्यवस्था वास्तव में सामाजिक असमानता को बनाए रखने और उसे बढ़ावा देने का कार्य करती है। बोर्दियु के अनुसार, सम्पन्न वर्गों के पास एक 'सांस्कृतिक पूँजी' होती है, जो उन्हें स्कूलों और कॉलेजों के भद्र परिवेश में सहज बनाती है, जबकि निम्न वर्ग के बच्चे वहाँ एक 'अघोषित हिंसा' और अलगाव महसूस करते हैं। लेख यह समझने में मदद करता है कि केवल स्कूलों में प्रवेश दिला देना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि यह देखना ज़रूरी है कि स्कूल की संस्कृति किस वर्ग को लाभ पहुँचा रही है। यह भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त जातिगत और वर्गगत विषमताओं को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण समाजशास्त्रीय ढाँचा प्रदान करता है।
| Item Type: | Article |
|---|---|
| Discipline: | Education |
| Programme: | Works of Partner Organisations > Digantar > Shiksha Vimarsh |
| Title(English): | Sociological Theories of Education-VII: Pierre Bourdieu |
| Creators(English): | Amman Madan |
| Publisher: | Digantar |
| Journal or Publication Title(English): | Shikhsha Vimarsh |
| Related URLs: | |
| URI: | http://anuvadasampada.azimpremjiuniversity.edu.in/id/eprint/5665 |
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Disclaimer
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ಅಜೀಂ ಪ್ರೇಮ್ಜಿ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯದ ಅನುವಾದ ಉಪಕ್ರಮದ ವತಿಯಿಂದ ಇದನ್ನು ಇಂಗ್ಲೀಷ್ನಿಂದ ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ಅನುವಾದಿಸಲಾಗಿದೆ. ಈ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಸಂಪನ್ಮೂಲವನ್ನು ವಾಣಿಜ್ಯೇತರ, ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಉದ್ದೇಶಗಳಿಗೆ ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ.
